सामाजिक कार्य की शुरुआत

राजकुमार जी बचपन से ही दूसरों की मदद करना अच्छा लगता था, स्कूल हो या गॉव कहीं भी कोई मुसीबत में होता था तो राजकुमार जी अपनी हर संभव प्रयास करके उसकी मुसीबत को हल करने का प्रयास करते थे ! पैसों की ज़रूरत को पूर्ण करने के लिए राजकुमार जी स्कूल से छुट्टी होने के बाद खेतों में काम करने के लिए जाया करते थे और वहाँ से जो पैसें मिलते थे उसको अपनी ज़रूरतों के साथ साथ गरीब बच्चों की मदद करने में भी खर्च किया करते थे! राजकुमार जी ने अपने गॉव के गरीब परिवारों के बच्चों की मदद के लिए अपने पैसे से एक बिना मान्यता का एक विद्यालय खोल लिया जहाँ पर लगभग 30-35 बच्चों को साथ जोड़कर निःशुल्क शिक्षा देने का कार्य करने लगे कुछ समय बाद राजकुमार जी की शादी हो गई और वह परिवार के बंधन में बन्ध गए, इसी दौरान गॉव के अन्य लोगों के साथ मिलकर राजकुमार जी ने एक कला मन्च का गठन किया जिसका नाम “आदर्श कला मन्च” रखा गया ! कलामन्च के माध्यम से राजकुमार जी अपने साथियों के साथ मिलकर नाटकों के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों व अन्धविश्वास को दूर करने का कार्य करने लगे ! आदर्श कला मन्च से जुड़े रहने के समय राजकुमार जी की मुलाक़ात अखिल भारतीय कल्याणकारी समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश चन्द्र बहुगुणा जी से हुई, बहुगुणा जी की संस्था भी सामाजिक क्षेत्र में कार्य किया करती थी तो राजकुमार जी ने बहुगुणा जी के साथ मिलकर सामजिक कार्य करना प्रारम्भ कर दिया ! सन 1996 में बहुगुणा जी को जानकारी मिली कि क्राई नाम की एक संस्था है जो फ़ेलोशिप व प्रोजेक्ट देकर सामाजिक कार्य करती है उसमे हम लोग आवेदन कर सकते है ! आवेदन के समय पता चला कि प्रोजेक्ट केवल उन्ही को मिल सकता है जिनकी संस्था रजिस्टर्ड होगी जबकि अन्य लोगों के लिए फेलोशिप कार्यक्रम है तो राजकुमार जी ने फेलोशिप के लिए आवेदन किया ! निश्चित समयावधि के बाद दिल्ली ऑफिस में राजकुमार जी को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और फिर 1 जनवरी 1997 में फ़ेलोशिप कार्यक्रम शुरू हो गया, फेलोशिप के माध्यम से राजकुमार जी द्वारा वज़ीरगंज ब्लॉक के 5 ग्रामों में अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र (NFE Centre-Non Formal Education) खोले गए, इन 5 ग्रामों में से 4 ग्राम ऐसे चिन्हित किये गए जहाँ पर सरकार द्वारा कोई भी परिषदीय विद्यालय स्थापित नहीं था तथा एक गॉव जिसमे पहले से ही शिक्षा केन्द्र चल रहा था ! NFE केन्द्र चलाने के लिए राजकुमार जी द्वारा वालंटियर नियुक्त कर बच्चों को शिक्षा देने का कार्य किया गया केन्द्र पर राजकुमार जी द्वारा बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता पर पूर्ण ध्यान दिया गया साथ ही साथ राजकुमार जी द्वारा केन्द्र पर आने वाले बच्चों के अभिभावकों के साथ समय समय पर बैठकें कर उनकी ज़रूरतों की पूर्ति के लिए भी पहल की जाने लगी ! फेलोशिप के दौरान क्राई समन्वयक श्री वी० के० दास जी ने बदायूं में विज़िट किया और राजकुमार जी के कार्यों को देखते हुए उन्हें बताया कि आपका कार्य अच्छा चल रहा है बच्चों की शिक्षा के साथ साथ आप समुदाय के साथ भी पहल कर रहे है ऐसे में अगर आप अपने इस कला मन्च को रजिस्टर्ड करवाले तो आने वाले समय में क्राई आपको पार्टनर भी बना सकती है ! राजकुमार जी को बचपन से ही समाज सेवा का जूनून था, जो कष्ट/पीड़ा उन्होंने अपने बचपन में उठाई थी वह नहीं चाहते थे कि और बच्चे भी वही कष्ट उठाये इसलिए राजकुमार जी ने क्राई समन्वयक की बात ध्यान में रखते हुए 15 जून 1998 को समग्र विकास संस्थान बदायूं के नाम से संस्था का रजिस्ट्रेशन करवा लिया और संस्था के माध्यम से अपने कार्य में गति दी !

दूसरी ओर फेलोशिप के माध्यम से राजकुमार जी द्वारा चलाये जा रहे NFE केन्द्रों के माध्यम से बच्चों व समाज में काफी सुधार दिखने लगा जो निम्न है

  • • समुदाय के लोग शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपने बच्चों को NFE केन्द्र से जोड़ने लगे थे।
  • • प्रति केन्द्र पर 40-50 बच्चे नामांकित हुए; कुल 5 केन्द्रों पर 250 कभी स्कूल न जाने वाले बच्चों को जोड़ा गया।
  • • मौसम के अनुसार NFE केन्द्र चलाने में असुविधा को देखते हुए समुदाय ने अपनी/ग्राम सभा की जगह उपलब्ध करवाने में सहयोग किया।
  • • NFE में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार हुआ, जिसके बाद उन्हें स्कूली शिक्षा से भी जोड़ा गया।
  • • बच्चे स्कूल और NFE दोनों स्थानों पर नियमित रूप से आने लगे, जिससे शिक्षा स्तर में निरंतर सुधार हुआ।
  • • NFE केन्द्रों के संचालन से कभी स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या में कमी आने लगी।
  • • मासिक आधार पर आयोजित अभिभावक बैठकों में समुदाय के लोग भाग लेने लगे।
  • • बैठकों के माध्यम से अभिभावकों ने बच्चों के हक और अधिकारों को समझना शुरू किया।
  • • गांव में विद्यालय खुलवाने की मांग के लिए लोग राजकुमार जी के साथ मिलकर पैरवी करने को तैयार हुए।
  • • शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ अच्छा समन्वय स्थापित हुआ, जिससे वे NFE केन्द्रों का भ्रमण कर शिक्षा गुणवत्ता सुधार हेतु सुझाव देने लगे।
  • • जिला स्तरीय आकांक्षा समिति की अध्यक्ष मालिनी अवस्थी द्वारा ग्राम नगरिया को गोद लिया गया।
  • • ग्राम सदस्य ऋषिपाल जी द्वारा दी गई भूमि पर मालिनी अवस्थी जी ने NFE के लिए भवन बनवाया, जो विद्यालय खुलने के बाद ऋषिपाल जी को सौंप दिया गया।

उक्त सभी कार्यों को ध्यान में रखते हुए सन 1999 में क्राई द्वारा समग्र विकास संस्थान के साथ पार्टनरशिप शरू की और प्रोजेक्ट बेस कार्य करना प्रारम्भ किया तो संस्था द्वारा ब्लॉक वज़ीरगंज के साथ साथ ब्लॉक उसावां के ग्रामों को कार्यक्षेत्र के लिए चुना और 5 ग्रामों से बढ़ाकर 10 ग्रामों में कार्य किया जो वर्तमान में 22 ग्रामों तक फैल गया है ! इसी बीच राजकुमार जी की संस्था 2022 में लोकल फण्ड से FCRA में रजिस्टर्ड हुई जिसके चलते संस्था को एक और प्रोजेक्ट “जिव दया फाउंडेशन” के नाम से मिला जो कि अमेरिका की संस्था है और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर काम करती है ! इस प्रोजेक्ट में संस्था द्वारा 05 नयें गाँव चिन्हित किये गए जहाँ कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक थी ! इन बच्चों ( 01 वर्ष से 05 वर्ष के) को पर्लेजी बिस्कुट और दूध खिलाने पिलाने का काम किया जाता है ! इस काम के लिए ग्राम स्तर से वालेंटियर चुने गएँ है ! पोषण को पूर्ण करने के साथ साथ बच्चों को विद्यालय पूर्व शिक्षा भी दी जाती है ! वर्तमान समय में संस्था जनपद बदायूं के 03 ब्लॉक उझानी, जगत और उसावां के 27 गाँव में कार्यरत है !

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समग्र विकास संस्थान (एसवीएस) एक बाल अधिकार संगठन है जो वंचित समुदाय के बीच सामुदायिक गतिशीलता के साथ-साथ शिक्षा और बच्चों से संबंधित सभी मुद्दों पर काम कर रहा है।

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  • पंजीकृत पता: ग्राम व पोस्ट रोटा, बदायूं उत्तर प्रदेश, भारत।
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